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Showing posts from July, 2017

जमाने

"धीरे धीरे उम्र कट जाती हैं!
"जीवन यादों की पुस्तक बन जाती है!"कभी किसी की याद बहुत तड़पाती है!
"और कभी यादों के सहारे जिंदगी कट जाती है!"किनारो पे सागर के खजाने नहीं आते!
"फिर जीवन में दोस्त पुराने नहीं आते!"जी लो इन पलों को हंस के दोस्तो
"फिर लौट के दोस्ती के जमाने नहीं  आते!!

नाम

उसकी पहचान हमारे नाम से थी और आज वह अपनी पहचान बना कर हमारा नाम पूछता है

नजर

|| उम्र भर उठाया बोझ उस 'कील" ने ..और लोग तारीफ़ 'तस्वीर' की करते रहे ||

Dard

कितनी बार मेरी आंखें भर गयीं
अपने अंदर के समंदर सुखाने में

Mari

तुम मेरी पहली कविता हो, जिसे मैं दूबारा लिखना चाहूंगा।

सच जिंदगी का

एक आम आदमी सुबह जागने के बाद सबसे पहले टॉयलेट जाता है,
बाहर आ कर साबुन से हाथ धोता है,दाँत ब्रश करता है,नहाता है,कपड़े पहनकर तैयार होता है, अखबार पढता है,नाश्ता करता है,घर से काम के लिए निकल जाता है,बाहर निकल कर रिक्शा करता है, फिर लोकल बस या ट्रेन में या अपनी सवारी से ऑफिस पहुँचता है,वहाँ पूरा दिन काम करता है, साथियों के साथ चाय पीता है,
शाम को वापिस घर के लिए निकलता है,घर के रास्ते में बच्चों के लिए टॉफी, बीवी के लिए मिठाई वगैरह लेता है,मोबाइल में रिचार्ज करवाता है, और अनेक छोटे मोटे काम निपटाते हुए घर पहुँचता है,अब आप बताइये कि उसे दिन भर में कहीं कोई "हिन्दू" या "मुसलमान" मिला ?क्या उसने दिन भर में किसी "हिन्दू" या "मुसलमान" पर कोई अत्याचार किया ?उसको जो दिन भर में मिले वो थे.. अख़बार वाले भैया,दूध वाले भैया,रिक्शा वाले भैया,बस कंडक्टर,ऑफिस के मित्र,आंगतुक,पान वाले भैया,चाय वाले भैया,टॉफी की दुकान वाले भैया,मिठाई की दूकान वाले भैया..जब ये सब लोग भैया और मित्र हैं तो इनमें "हिन्दू" या "मुसलमान" कहाँ है ?"क्या दिन भर म…