Skip to main content
मेरे पास हो कर भी
तू इतना दूर क्यों है
देखने में दरिया है पर
स्वाद में समंदर क्यों है
मिले जब भी तुझसे हम
मिले खुले आसमान की तरह
तेरे मेरे प्यार के बीच
यह बवंडर क्यों है
और दिल दिया है मुझको
मेरा ऐतबार भी करो
यदि कुछ चाहता हूँ तुमसे
तो यह ख़िलाफ़त क्यों है
तुम कोई काँच नहीं
जो छूने से टूट जाओगे
कस कर थाम लो हाथ मेरा
इतनी नज़ाकत क्यों है
दुनियाँ की परवाह छोड़ दो
लोगों का ज़मीर अब जारी हो गया है
जब उनको तुम्हारी नहीं
तुम्हें उनकी ज़रूरत क्यों है

Comments

Popular posts from this blog

जमाने

"धीरे धीरे उम्र कट जाती हैं! "जीवन यादों की पुस्तक बन जाती है! "कभी किसी की याद बहुत तड़पाती है! "और कभी यादों के सहारे जिंदगी कट जाती है! "किनारो पे सागर के खजाने नहीं आते! "फिर जीवन म...
पहले ध्यान से पढ़े इसके बाद कुछ कमेंट करें । एक स्त्री के पैरो के बीच से जन्म लेने के बाद उसके वक्षस्थल से निकले दूध से अपनी भूख, प्यास मिटाने वाला इंसान..... बड़ा होते ही औरत से इन्हीं दो अंगो की चाहत रखता है....।।। और अगर असफल होता है तो इसी चाहत में वीभत्स तरीको को अंजाम देता है.। बलात्कार और फिर हत्या।। जननी वर्ग के साथ इस तरह की मानसिकता क्यूँ??? वध होना चाहिए ऐसी दूषित मानसिकता के लोगों का। मेरी नजरों में बलात्कार से बड़ा कोई जुर्म नहीं है धरती पर। इस पर आत्म मंथन कीजिए कि जो तुम्हारी माँ, बहिन, बेटी के आँचल में हैं वो इज्जत हैं..... तब दूसरी स्त्रियां तुम्हारी रखैल कैसे??? महिलाओं आके साथ इस तरह का दुर्व्यवहार इस दुनिया का सबसे नीच, गन्दा, शर्मनाक कृत्य है...... एक लड़का Fecebook पर पोस्ट करने पर जेल भेज दिया जाता हैं& बलात्कार करने वाले को बाल ग्रह सुधार केंद्र भेजा जाता है ये भारत मे ही क्यों हो रहा है Plz,,,,,,,,, हर नारी की इज्जत करे , कृपया अपनी राय जरुर दें जय श्री राधे कृष्णा
  मैंने जब जब तुझसे रूठने के जतन किये   तेरी मुस्कुराहट ने आकर गले लगा लिया मुझे♥