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श्रदा

*परमात्मा के पास बैठिये*
*इतने गहरे भाव से कि*
*आँसू आ जाएँ,*
*किसी प्रकार की कोई आकांक्षा*
*या मांग न रखें,*
*परमात्मा का होना ही आशीर्वाद है*
*मांगना नहीं पड़ता*
*उनके पास होने से ही सब मिल जाता है।*
*जैसे फूल के पास जाओ*
*खुशबू अपने आप ही मिलने लगती है*
*परमात्मा ने सारी व्यवस्था पहले ही की हुई है*
*मांगने की जरूरत ही नही है*
*बस उनके पास जाना है,*
*उनकी शरणागति स्वीकार कर लेना*
*उनके बताये मार्ग पर चलना*
*हमारा कर्तव्य बस इतना ही है*
*बाकी सब कुछ स्वयं ही हो जाता है।*

*बोलो साईं नाथ महाराज की जय* 🙏🏻🌹🍂

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पहले ध्यान से पढ़े इसके बाद कुछ कमेंट करें ।

एक स्त्री के पैरो के बीच से जन्म लेने के बाद उसके वक्षस्थल से निकले दूध से अपनी भूख, प्यास मिटाने वाला इंसान.....
बड़ा होते ही औरत से इन्हीं दो अंगो की चाहत रखता है....।।।
और अगर असफल होता है तो इसी चाहत में वीभत्स तरीको को अंजाम देता है.।
बलात्कार और फिर हत्या।।
जननी वर्ग के साथ इस तरह की मानसिकता क्यूँ???
वध होना चाहिए ऐसी दूषित मानसिकता के लोगों का।
मेरी नजरों में बलात्कार से बड़ा कोई जुर्म नहीं है धरती पर।
इस पर आत्म मंथन कीजिए कि जो तुम्हारी माँ, बहिन, बेटी के आँचल में हैं वो इज्जत हैं.....
तब दूसरी स्त्रियां तुम्हारी रखैल कैसे???
महिलाओं आके साथ इस तरह का दुर्व्यवहार इस दुनिया का सबसे नीच, गन्दा, शर्मनाक कृत्य है......
एक लड़का Fecebook पर पोस्ट करने पर जेल भेज दिया जाता हैं& बलात्कार करने वाले को बाल ग्रह सुधार केंद्र भेजा जाता है
ये भारत मे ही क्यों हो रहा है
Plz,,,,,,,,, हर नारी की इज्जत करे ,
कृपया अपनी राय जरुर दें जय श्री राधे कृष्णा

Jindgi

*लोग जल जाते हैं मेरी मुस्कान पर क्योंकि*
*मैंने कभी दर्द की नुमाइश नहीं की* *जिंदगी से जो मिला कबूल किया*
*किसी चीज की फरमाइश नहीं की* *मुश्किल है समझ पाना मुझे क्योंकि*
*जीने के अलग है अंदाज मेरे**जब जहां जो मिला अपना लिया*
*ना मिला उसकी ख्वाहिश नहीं की।*.                                                 🙏
दुनियाँ की निग़ाह में
एक जुर्म हो गया था
वो जो तुझसे मोहब्बत में
तू मेरा दिल हो गया था
मिलती कभी कभी तो
दुआ गिन लेते हम
हमने तो हाथ फैलाए और
सब मिल गया था
मुझको तबियत से मिली है
सब की बद्ददुआएँ
फिर भी कुछ कहते हैं
क़िस्मत से कम मिला था
उसके मिजाज़ में अब
वो फ़नकारी नहीं
जब कभी मिलता है लगता है
यूँ ही मिला था
अब होशो हवास में लाकर
उसकी याद क्या दिलायेगा
मैं तो नींद में भी हरदम
उसके संग चला था